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mahabharat 7.48.12: यह कहकर अभिमन्यु ने एक शिल्पी द्वारा धारदार बनाया हुआ भाला दुशासन के पुत्र पर फेंका; किन्तु अश्वत्थामा ने तीन बाण चलाकर भाले को दो भागों में काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.48.12 
एतावदुक्त्वा वचनं कर्मारपरिमार्जितम्।
नाराचं विससर्जास्मै तं द्रौणिस्त्रिभिराच्छिनत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर अभिमन्यु ने एक शिल्पी द्वारा धारदार बनाया हुआ भाला दुशासन के पुत्र पर फेंका; किन्तु अश्वत्थामा ने तीन बाण चलाकर भाले को दो भागों में काट डाला।
 
Having said these words, Abhimanyu threw a spear sharpened by a craftsman at the son of Dussana; but Ashvatthama shot three arrows and cut the spear in half.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)