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mahabharat 7.48.10: यह देखकर अर्जुन के पुत्र ने क्रोध से लाल-लाल आँखें करके दु:शासन के पुत्र को सात बाणों से बींध डाला और ऊँचे स्वर में यह कहा-॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.48.10 
ततो दौ:शासनिं कार्ष्णिर्विद्‍ध्वा सप्तभिराशुगै:।
संरम्भाद् रक्तनयनो वाक्यमुच्चैरथाब्रवीत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर अर्जुन के पुत्र ने क्रोध से लाल-लाल आँखें करके दु:शासन के पुत्र को सात बाणों से बींध डाला और ऊँचे स्वर में यह कहा-॥10॥
 
Seeing this, Arjun's son, his eyes turning red with anger, pierced Dushasan's son with seven arrows and said this in a loud voice -॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)