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mahabharat 7.48.1: संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् अर्जुनपुत्र अभिमन्यु ने पुनः कर्ण के कान पर बाण से वार किया और उसे क्रोधित करके उस पर पचास बाण चलाकर उसे अत्यन्त घायल कर दिया॥1॥   |   mahabharat अध्याय 7.48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.48.1 
संजय उवाच
स कर्णं कर्णिना कर्णे पुनर्विव्याध फाल्गुनि:।
शरै: पञ्चाशता चैनमविध्यत् कोपयन् भृशम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् अर्जुनपुत्र अभिमन्यु ने पुनः कर्ण के कान पर बाण से वार किया और उसे क्रोधित करके उस पर पचास बाण चलाकर उसे अत्यन्त घायल कर दिया॥1॥
 
Sanjaya says - O King! Thereafter Abhimanyu, the son of Arjun, again wounded Karna's ear with an arrow and enraged him by shooting fifty arrows at him, severely injuring him.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)