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mahabharat 7.47.21: रथहीन होने के कारण कोसलनरेश ने अपने हाथों में ढाल और तलवार ली और अभिमन्यु के कुंडल से सुसज्जित सिर को उसके शरीर से अलग करने का निर्णय लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.47.21 
अथ कोसलराजस्तु विरथ: खड्गचर्मभृत्।
इयेष फाल्गुने: कायाच्छिरो हर्तुं सकुण्डलम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
रथहीन होने के कारण कोसलनरेश ने अपने हाथों में ढाल और तलवार ली और अभिमन्यु के कुंडल से सुसज्जित सिर को उसके शरीर से अलग करने का निर्णय लिया।
 
Being without a chariot, Kosalanareshan took up his shield and sword in his hands and decided to cut off Abhimanyu's earring-adorned head from his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)