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mahabharat 7.47.16: महाबली और पराक्रमी अभिमन्यु ने अपने दुष्ट अश्वत्थामा को सुवर्ण पंख वाले तिहत्तर बाणों से पुनः घायल कर दिया। 16॥   |   mahabharat अध्याय 7.47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.47.16 
स तु द्रौणिं त्रिसप्तत्या हेमपुङ्खैरजिह्मगै:।
प्रत्यविध्यन्महातेजा बलवानपकारिणम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाबली और पराक्रमी अभिमन्यु ने अपने दुष्ट अश्वत्थामा को सुवर्ण पंख वाले तिहत्तर बाणों से पुनः घायल कर दिया। 16॥
 
Abhimanyu, the powerful and powerful Abhimanyu, again injured his evil Ashwatthama with seventy-three arrows having golden feathers. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)