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mahabharat 7.47.15: तब द्रोणपुत्र ने अभिमन्यु को साठ तीखे और भयंकर बाणों से घायल कर दिया; परंतु वे बाण उसे छेदने पर भी मैनाक पर्वत के समान ऊँचे अभिमन्यु को हिला न सके।   |   mahabharat अध्याय 7.47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.47.15 
षष्टॺा शराणां तं द्रौणिस्तिग्मधारै: सुतेजनै:।
उग्रैर्नाकम्पयद् विद्‍ध्वा मैनाकमिव पर्वतम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तब द्रोणपुत्र ने अभिमन्यु को साठ तीखे और भयंकर बाणों से घायल कर दिया; परंतु वे बाण उसे छेदने पर भी मैनाक पर्वत के समान ऊँचे अभिमन्यु को हिला न सके।
 
Then Drona's son pierced Abhimanyu with sixty sharp and fierce arrows; but even after piercing him they could not make Abhimanyu tremble who was as tall as the Mainak mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)