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mahabharat 7.47.13: फिर अश्वत्थामा ने निर्भय होकर शत्रु के प्रमुख योद्धाओं का संहार करते हुए अभिमन्यु को पच्चीस बाण मारे।   |   mahabharat अध्याय 7.47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.47.13 
तं द्रौणि: पञ्चविंशत्या क्षुद्रकाणां समार्पयत्।
वरं वरममित्राणामारुजन्तमभीतवत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
फिर अश्वत्थामा ने निर्भय होकर शत्रु के प्रमुख योद्धाओं का संहार करते हुए अभिमन्यु को पच्चीस बाण मारे।
 
Then, while killing the chief warriors of the enemy without fear, Ashwatthama shot Abhimanyu with twenty-five arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)