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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 47: अभिमन्युका पराक्रम, छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उसके द्वारा वृन्दारक तथा दस हजार अन्य राजाओंके सहित कोसलनरेश बृहद्‍बलका वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.47.11 
पातयित्वा कृपस्याश्वांस्तथोभौ पार्ष्णिसारथी।
अथैनं दशभिर्बाणै: प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कृपाचार्य के चारों घोड़ों और उनके दोनों पार्श्वरक्षकों को मारकर उसने दस बाणों से उनकी छाती छेद दी।
 
After killing all the four horses of Kripacharya and his two side guards, he pierced his chest with ten arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)