श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 46: अभिमन्युके द्वारा लक्ष्मण तथा क्राथपुत्रका वध और सेनासहित छ: महारथियोंका पलायन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.46.4 
संजय उवाच
संशुष्कास्याश्चलन्नेत्रा: प्रस्विन्ना लोमहर्षणा:।
पलायनकृतोत्साहा निरुत्साहा द्विषज्जये॥ ४॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - महाराज! आपके सभी सैनिकों के मुँह सूख गए थे, उनकी आँखें भय से फड़क रही थीं, उनका सारा शरीर पसीने से तर था और उनके रोंगटे खड़े हो गए थे। वे केवल भागने में ही उत्साह दिखा रहे थे। शत्रुओं को परास्त करने में उनमें कोई उत्साह नहीं था।
 
Sanjaya said - Maharaj! The mouths of all your soldiers had dried up, their eyes were fluttering with fear, their entire body was sweating and their hair had stood on end. They were showing enthusiasm only in running away. They did not have any enthusiasm in defeating their enemies.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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