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mahabharat 7.46.11-12: महाराज! आपका प्रिय पौत्र लक्ष्मण बड़ा ही प्रचण्ड योद्धा था। वह अपने पिता के पास धनुष लिए खड़ा था। बड़े आराम से पला-बढ़ा वह कुबेर के पुत्र के समान दिख रहा था। जिस प्रकार मदोन्मत्त हाथी मदोन्मत्त हाथी से भिड़ जाता है, उसी प्रकार अर्जुनपुत्र ने लक्ष्मण पर आक्रमण किया। 11-12.   |   mahabharat अध्याय 7.46: अभिमन्युके द्वारा लक्ष्मण तथा क्राथपुत्रका वध और सेनासहित छ: महारथियोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.46.11-12 
पौत्रं तव च दुर्धर्षं लक्ष्मणं प्रियदर्शनम्।
पितु: समीपे तिष्ठन्तं शूरमुद्यतकार्मुकम्॥ ११॥
अत्यन्तसुखसंवृद्धं धनेश्वरसुतोपमम्।
आससाद रणे कार्ष्णिर्मत्तो मत्तमिव द्विपम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपका प्रिय पौत्र लक्ष्मण बड़ा ही प्रचण्ड योद्धा था। वह अपने पिता के पास धनुष लिए खड़ा था। बड़े आराम से पला-बढ़ा वह कुबेर के पुत्र के समान दिख रहा था। जिस प्रकार मदोन्मत्त हाथी मदोन्मत्त हाथी से भिड़ जाता है, उसी प्रकार अर्जुनपुत्र ने लक्ष्मण पर आक्रमण किया। 11-12.
 
King! Your beloved grandson Lakshmana was a very fierce warrior. He was standing beside his father with his bow in his hand. Raised in great comfort, he looked like the son of Kubera. Just as a drunken elephant clashes with an intoxicated elephant, in the same manner Arjun's son attacked Lakshmana. 11-12.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)