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mahabharat 7.46.10: जैसे बादल अपनी जलधाराओं से पर्वत को सींचते हैं, वैसे ही वे महारथी अभिमन्यु पर बाणों की वर्षा करने लगे। जैसे चारों ओर से बहने वाली वायु बादलों को उड़ा ले जाती है, वैसे ही अभिमन्यु ने अकेले ही उन सबका मंथन किया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.46: अभिमन्युके द्वारा लक्ष्मण तथा क्राथपुत्रका वध और सेनासहित छ: महारथियोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 46: अभिमन्युके द्वारा लक्ष्मण तथा क्राथपुत्रका वध और सेनासहित छ: महारथियोंका पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.46.10 
तं तेऽभिषिषिचुर्बाणैर्मेघा गिरिमिवाम्बुभि:।
स तु तान् प्रममाथैको विष्वग्वातो यथाम्बुदान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादल अपनी जलधाराओं से पर्वत को सींचते हैं, वैसे ही वे महारथी अभिमन्यु पर बाणों की वर्षा करने लगे। जैसे चारों ओर से बहने वाली वायु बादलों को उड़ा ले जाती है, वैसे ही अभिमन्यु ने अकेले ही उन सबका मंथन किया॥10॥
 
Just as clouds irrigate a mountain with their streams of water, similarly they started showering arrows on the mighty warrior Abhimanyu. Just as the wind blowing from all sides blows away the clouds, similarly Abhimanyu alone churned them all.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)