Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.45.8: जैसे समुद्र में भटकी हुई नाव, वायु के वेग से भयभीत होकर तथा विशाल सागर में फँसकर डगमगाने लगती है, उसी प्रकार वह सेना अभिमन्यु के भय से काँप रही थी। | mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाग्राहगृहीतेव वातवेगभयार्दिता।
समकम्पत सा सेना विभ्रष्टा नौरिवार्णवे॥ ८॥
अनुवाद
जैसे समुद्र में भटकी हुई नाव, वायु के वेग से भयभीत होकर तथा विशाल सागर में फँसकर डगमगाने लगती है, उसी प्रकार वह सेना अभिमन्यु के भय से काँप रही थी।
Just as a boat which has lost its way in the sea, which is frightened by the force of the wind and which is caught by a huge ocean, begins to totter, similarly that army was trembling in fear of Abhimanyu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥