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mahabharat 7.45.23: राजन! वह युद्ध में अलात्चक्र के समान एक, एक लाख और एक हजार रूपों में प्रकट होता था और शीघ्रतापूर्वक शस्त्र चलाने में अपना कौशल दिखाता था। 23॥   |   mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.45.23 
एकधा शतधा राजन् दृश्यते स्म सहस्रधा।
अलातचक्रवत् संख्ये क्षिप्रमस्त्राणि दर्शयन्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राजन! वह युद्ध में अलात्चक्र के समान एक, एक लाख और एक हजार रूपों में प्रकट होता था और शीघ्रतापूर्वक शस्त्र चलाने में अपना कौशल दिखाता था। 23॥
 
Rajan! He was visible in one, hundred and thousands of forms like Alatchakra in battle, showing his skill in handling weapons quickly. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)