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mahabharat 7.45.22: अर्जुन ने तपस्या करके गन्धर्वों से जो तुम्बुरु नामक अस्त्र प्राप्त किया था, उसी से अभिमन्यु ने अपने शत्रुओं को मोहित कर लिया ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.45.22 
अर्जुनेन तपस्तप्त्वा गन्धर्वेभ्यो यदाहृतम्।
तुम्बुरुप्रमुखेभ्यो वै तेनामोहयताहितान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने तपस्या करके गन्धर्वों से जो तुम्बुरु नामक अस्त्र प्राप्त किया था, उसी से अभिमन्यु ने अपने शत्रुओं को मोहित कर लिया ॥22॥
 
Abhimanyu bewitched his enemies with the weapon that Arjun had obtained from the Gandharvas like Tumburu after doing penance. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)