Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.45.21: भरत! बाणों से अत्यन्त घायल होकर अभिमन्यु अंकुश से घायल हुए हाथी के समान क्रोध से भर गया। उसने गन्धर्वस्त्र का प्रयोग किया और रथमय (रथ युद्ध में निपुणता) प्रदर्शित की॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स गाढविद्ध: क्रुद्धश्च तोत्रैर्गज इवार्दित:।
गान्धर्वमस्त्रमायच्छद् रथमायां च भारत॥ २१॥
अनुवाद
भरत! बाणों से अत्यन्त घायल होकर अभिमन्यु अंकुश से घायल हुए हाथी के समान क्रोध से भर गया। उसने गन्धर्वस्त्र का प्रयोग किया और रथमय (रथ युद्ध में निपुणता) प्रदर्शित की॥ 21॥
Bharata! Abhimanyu, deeply wounded by the arrows, became furious like an elephant struck by the goad. He used Gandharvaastra and displayed Rathmaya (proficiency in chariot fighting).॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥