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mahabharat 7.45.20: हे आर्य! मैंने देखा कि अभिमन्यु का रथ, सारथि, घोड़े और ध्वजा सहित बाणों से उसी प्रकार आच्छादित हो गया है, जैसे साही का शरीर काँटों से आच्छादित हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.45.20 
ससूताश्वध्वजं तस्य स्यन्दनं तं च मारिष।
आचितं समपश्याम श्वाविधं शललैरिव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे आर्य! मैंने देखा कि अभिमन्यु का रथ, सारथि, घोड़े और ध्वजा सहित बाणों से उसी प्रकार आच्छादित हो गया है, जैसे साही का शरीर काँटों से आच्छादित हो जाता है।
 
O Arya! I saw Abhimanyu's chariot, along with its charioteer, horses and flag, all covered with arrows, just as the body of a porcupine is covered with thorns.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)