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mahabharat 7.45.2: इन्द्रपुत्र अर्जुन का बलवान पुत्र अभिमन्यु इन्द्र के समान ही पराक्रमी था। उस समय वह सम्पूर्ण व्यूह का मन्थन करता हुआ दिखाई दिया॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.45.2 
स शक्र इव विक्रान्त: शक्रसूनो: सुतो बली।
अभिमन्युस्तदानीकं लोडयन् समदृश्यत॥ २॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रपुत्र अर्जुन का बलवान पुत्र अभिमन्यु इन्द्र के समान ही पराक्रमी था। उस समय वह सम्पूर्ण व्यूह का मन्थन करता हुआ दिखाई दिया॥ 2॥
 
Abhimanyu, the powerful son of Indra's son Arjuna, was as valiant as Indra. At that time he was seen churning the entire array.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)