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mahabharat 7.45.14-16: हे राजन! अभिमन्यु को जीवित ही पकड़ लेने की इच्छा रखने वाले राजा शल्य के अभिमानी पुत्र रुक्मरथ को सुभद्रा के प्रतापी पुत्र ने मार डाला, यह देखकर शल्यपुत्र के बहुत से मित्र, जो आक्रमण करने में कुशल और युद्ध में उन्मत्तों के समान लड़ने वाले थे, अर्जुनपुत्र को चारों ओर से घेरकर उस पर बाणों की वर्षा करने लगे। उनकी ध्वजाएँ सोने की बनी थीं और वे महाबली योद्धा चार भुजाओं से धनुष खींच रहे थे॥14-16॥   |   mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 14-16
 
 
श्लोक  7.45.14-16 
दृष्ट्वा रुक्मरथं रुग्णं पुत्रं शल्यस्य मानिनम्।
जीवग्राहं जिघृक्षन्तं सौभद्रेण यशस्विना॥ १४॥
संग्रामदुर्मदा राजन् राजपुत्रा: प्रहारिण:।
वयस्या: शल्यपुत्रस्य सुवर्णविकृतध्वजा:॥ १५॥
तालमात्राणि चापानि विकर्षन्तो महाबला:।
आर्जुनिं शरवर्षेण समन्तात् पर्यवारयन्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! अभिमन्यु को जीवित ही पकड़ लेने की इच्छा रखने वाले राजा शल्य के अभिमानी पुत्र रुक्मरथ को सुभद्रा के प्रतापी पुत्र ने मार डाला, यह देखकर शल्यपुत्र के बहुत से मित्र, जो आक्रमण करने में कुशल और युद्ध में उन्मत्तों के समान लड़ने वाले थे, अर्जुनपुत्र को चारों ओर से घेरकर उस पर बाणों की वर्षा करने लगे। उनकी ध्वजाएँ सोने की बनी थीं और वे महाबली योद्धा चार भुजाओं से धनुष खींच रहे थे॥14-16॥
 
O King! Seeing that Rukmaratha, the proud son of King Shalya, who wanted to capture Abhimanyu alive, was killed by the illustrious son of Subhadra, many of Shalya's son's friends, who were skilled in attacking and fought like madmen in battle, surrounded Arjuna's son from all sides and showered arrows on him. Their flags were made of gold, and those mighty warriors were drawing bows with four hands.॥14-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)