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mahabharat 7.45.12: अभिमन्यु की छाती में तीन बाण मारकर उन्होंने गर्जना की। फिर उन्होंने उसकी दाहिनी भुजा में तीन और बाईं भुजा में तीन तीखे बाण मारे।   |   mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.45.12 
सोऽभिमन्युं त्रिभिर्बाणैर्विद्‍ध्वा वक्षस्यथानदत्।
त्रिभिश्च दक्षिणे बाहौ सव्ये च निशितैस्त्रिभि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु की छाती में तीन बाण मारकर उन्होंने गर्जना की। फिर उन्होंने उसकी दाहिनी भुजा में तीन और बाईं भुजा में तीन तीखे बाण मारे।
 
He roared after shooting three arrows into Abhimanyu's chest. Then he shot three arrows into his right arm and three sharp arrows into his left arm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)