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mahabharat 7.45.11: यह कहकर वीर रुक्मरथ अपने सुन्दर सुसज्जित एवं तेजस्वी रथ पर सवार होकर सुभद्रापुत्र अभिमन्यु की ओर दौड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.45.11 
एवमुक्त्वा तु सौभद्रमभिदुद्राव वीर्यवान्।
सुकल्पितेनोह्यमान: स्यन्दनेन विराजता॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर वीर रुक्मरथ अपने सुन्दर सुसज्जित एवं तेजस्वी रथ पर सवार होकर सुभद्रापुत्र अभिमन्यु की ओर दौड़े।
 
Saying this, the valiant Rukmaratha rode his beautifully decorated and resplendent chariot and rushed towards Abhimanyu, the son of Subhadra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)