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श्लोक 7.44.9  |
सोऽभिमन्युं शरै: षष्टॺा रुक्मपुङ्खैरवाकिरत्।
अब्रवीच्च न मे जीवञ्जीवतो युधि मोक्ष्यसे॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने अभिमन्यु पर सुवर्णमय पंखवाले साठ बाण बरसाए और कहा, 'अब जब तक मैं जीवित हूँ, तुम इस युद्ध से जीवित बचकर नहीं निकल सकोगे॥9॥ |
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| He showered sixty arrows having golden feathers on Abhimanyu and said, 'Now you will not be able to escape this war alive as long as I am alive.॥ 9॥ |
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