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mahabharat 7.44.21: जब अभिमन्यु अपने बाणों से योद्धाओं के प्राण हर रहा था और सेना के मध्य में सूर्य के समान खड़ा था, तब कोई भी योद्धा उसकी ओर देखने का साहस नहीं कर सकता था ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 7.44: अभिमन्युका पराक्रम और उसके द्वारा वसातीय आदि अनेक योद्धाओंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 44: अभिमन्युका पराक्रम और उसके द्वारा वसातीय आदि अनेक योद्धाओंका वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.44.21 
तं तदा नाशकत् कश्चिच्चक्षुर्भ्यामभिवीक्षितुम्।
आददानं शरैर्योधान् मध्ये सूर्यमिव स्थितम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब अभिमन्यु अपने बाणों से योद्धाओं के प्राण हर रहा था और सेना के मध्य में सूर्य के समान खड़ा था, तब कोई भी योद्धा उसकी ओर देखने का साहस नहीं कर सकता था ॥ 21॥
 
When Abhimanyu was taking the lives of warriors with his arrows and was standing like the Sun in the centre of the formation, no warrior could dare to look at him. ॥ 21॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि अभिमन्युपराक्रमे चतुश्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें अभिमन्युका पराक्रमविषयक चौवालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)