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mahabharat 7.44.10: तब अभिमन्यु ने लोहे के कवच से सुसज्जित वसत्य की छाती में दूर तक निशाना लगाने वाले बाण से प्रहार किया और वह निर्जीव होकर भूमि पर गिर पड़ा॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.44: अभिमन्युका पराक्रम और उसके द्वारा वसातीय आदि अनेक योद्धाओंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 44: अभिमन्युका पराक्रम और उसके द्वारा वसातीय आदि अनेक योद्धाओंका वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.44.10 
तमयस्मयवर्माणमिषुणा दूरपातिना।
विव्याध हृदि सौभद्र: स पपात व्यसु: क्षितौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब अभिमन्यु ने लोहे के कवच से सुसज्जित वसत्य की छाती में दूर तक निशाना लगाने वाले बाण से प्रहार किया और वह निर्जीव होकर भूमि पर गिर पड़ा॥10॥
 
Then Abhimanyu struck Vasatiya, who was dressed in iron armour, in the chest with an arrow capable of hitting a target at a long distance, and he fell lifeless on the ground.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)