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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.43.6 
स विस्फार्य महच्चापं किरन्निषुगणान् बहून्।
तत् खण्डं पूरयामास यद् व्यदारयदार्जुनि:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपना विशाल धनुष तानकर बाणों की वर्षा की और सेना के उस भाग को, जिसे अभिमन्यु ने तोड़ दिया था, योद्धाओं से भर दिया।
 
Stretching out his huge bow and showering a volley of arrows, he filled that part of the formation, which had been broken by Abhimanyu, with warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)