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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.43.18 
यतमानास्तु ते वीरा मत्स्यपञ्चालकेकया:।
पाण्डवाश्चान्वपद्यन्त प्रतिशेकुर्न सैन्धवम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वीर मत्स्य, पांचाल, केकय और पांडवों ने बार-बार सेना पर आक्रमण करने का प्रयास किया, लेकिन वे सिंधु नरेश के सामने टिक नहीं सके।
 
The valiant Matsyas, Panchalas, Kekayas and Pandavas tried again and again to attack the formation, but they were unable to stand before the King of Sindhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)