Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.43.16: जयद्रथ ने अकेले ही अपने अस्त्रों के बल से क्रोधित पाण्डवों को रोक दिया। सब लोग उसकी वीरता की प्रशंसा करने लगे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 7.43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.43.16 
संक्रुद्धान् पाण्डवानेको यद् दधारास्त्रतेजसा।
तत् तस्य कर्म भूतानि सर्वाण्येवाभ्यपूजयन्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जयद्रथ ने अकेले ही अपने अस्त्रों के बल से क्रोधित पाण्डवों को रोक दिया। सब लोग उसकी वीरता की प्रशंसा करने लगे॥16॥
 
Jayadratha single-handedly stopped the enraged Pandavas with the power of his weapons. Everyone began to praise his valour.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)