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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.43.14 
स हताश्वादवप्लुत्य च्छिन्नधन्वा रथोत्तमात्।
सात्यकेराप्लुतो यानं गिर्यग्रमिव केसरी॥ १४॥
 
 
अनुवाद
धनुष कट जाने पर भीमसेन अपने अश्वरहित रथ से कूदकर सात्यकि के रथ पर इस प्रकार बैठ गये, मानो कोई सिंह पर्वत की चोटी पर चढ़ गया हो।
 
After his bow was cut, Bhimasena jumped from his horseless chariot and sat on Satyaki's chariot as if a lion had climbed to the top of a mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)