vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना
»
श्लोक 14
श्लोक
7.43.14
स हताश्वादवप्लुत्य च्छिन्नधन्वा रथोत्तमात्।
सात्यकेराप्लुतो यानं गिर्यग्रमिव केसरी॥ १४॥
अनुवाद
धनुष कट जाने पर भीमसेन अपने अश्वरहित रथ से कूदकर सात्यकि के रथ पर इस प्रकार बैठ गये, मानो कोई सिंह पर्वत की चोटी पर चढ़ गया हो।
After his bow was cut, Bhimasena jumped from his horseless chariot and sat on Satyaki's chariot as if a lion had climbed to the top of a mountain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×