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mahabharat 7.43.10: तब धर्मपुत्र पराक्रमी राजा युधिष्ठिर ने घोषणा की कि मैं एक तीक्ष्ण और जलरूपी भाले से उसके धनुष को काट डालूँगा और हँसकर उसे काट डालूँगा॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.43.10 
अथास्य शितपीतेन भल्लेनादिश्य कार्मुकम्।
चिच्छेद प्रहसन् राजा धर्मपुत्र: प्रतापवान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब धर्मपुत्र पराक्रमी राजा युधिष्ठिर ने घोषणा की कि मैं एक तीक्ष्ण और जलरूपी भाले से उसके धनुष को काट डालूँगा और हँसकर उसे काट डालूँगा॥10॥
 
Then the mighty King Yudhishthira, the son of Dharma, announced that he would cut his bow with a sharp and watery spear and smilingly cut it.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)