श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 43: पाण्डवोंके साथ जयद्रथका युद्ध और व्यूहद्वारको रोक रखना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.43.1 
संजय उवाच
यन्मां पृच्छसि राजेन्द्र सिन्धुराजस्य विक्रमम्।
शृणु तत् सर्वमाख्यास्ये यथा पाण्डूनयोधयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - राजन! आप मुझसे सिंधुराज जयद्रथ के पराक्रम के विषय में जो पूछ रहे हैं, उसे सुनिए। मैं आपको वह सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाता हूँ, जो उसने पाण्डवों के साथ युद्ध करते समय कहा था॥ 1॥
 
Sanjaya says - King! Please listen to what you are asking me about the valour of Sindhuraj Jayadratha. I will tell you the entire story of how he fought with the Pandavas.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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