Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.42.d1-d2: साधुशिरोमणे सुत! जयद्रथ में इन्द्रिय संयम या ब्रह्मचर्य बताइए। विष्णु, शिव या ब्रह्मा, किस देवता की आराधना करके राजा सिंधु ने अपने पुत्र की रक्षा में तत्पर पांडवों को क्रोधित होकर रोक दिया था? मुझे नहीं मालूम कि भीष्म ने भी ऐसा महान पराक्रम किया था या नहीं। | mahabharat अध्याय 7.42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
साधुशिरोमणे सुत! जयद्रथ में इन्द्रिय संयम या ब्रह्मचर्य बताइए। विष्णु, शिव या ब्रह्मा, किस देवता की आराधना करके राजा सिंधु ने अपने पुत्र की रक्षा में तत्पर पांडवों को क्रोधित होकर रोक दिया था? मुझे नहीं मालूम कि भीष्म ने भी ऐसा महान पराक्रम किया था या नहीं।
Sadhushiromane sut! Tell me the restraint of senses or celibacy in Jayadratha. By worshiping which god Vishnu, Shiva or Brahma, did King Sindhu angrily stop the Pandavas who were ready to protect his son? I don't know whether Bhishma also performed such a great feat.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥