Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.42.14-15: वह सनातन ब्रह्म भगवान शंकर की आराधना करने लगा। तब भक्तों पर कृपा करने वाले भगवान ने उस पर कृपा की और जयद्रथ को स्वप्न में दर्शन देकर कहा, 'जयद्रथ! तुम क्या चाहते हो? वर मांगो। मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ।'॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 7.42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह सनातन ब्रह्म भगवान शंकर की आराधना करने लगा। तब भक्तों पर कृपा करने वाले भगवान ने उस पर कृपा की और जयद्रथ को स्वप्न में दर्शन देकर कहा, 'जयद्रथ! तुम क्या चाहते हो? वर मांगो। मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ।'॥14-15॥
He started worshipping Lord Shankar, the eternal Brahman. Then the Lord, who is merciful to his devotees, showered His blessings on him and appeared before Jayadratha in his dream and said to him, 'Jaydratha! What do you want? Ask for a boon. I am very pleased with you.'॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥