Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.42.1-2: धृतराष्ट्र बोले- संजय! वीर बालक अभिमन्यु, जिसका पालन-पोषण बड़े आराम से हुआ था, युद्ध में निपुण था। उसे अपने बाहुबल पर गर्व था। कुलीन कुल में जन्म लेकर भी वह अपना शरीर त्यागकर युद्ध कर रहा था। जब वह तीन वर्ष के उत्तम घोड़ों पर सवार होकर मेरी सेना में प्रवेश कर रहा था, तब क्या युधिष्ठिर की सेना का कोई भी बलवान योद्धा सेना के भीतर उसके पीछे-पीछे आ सकता था? | mahabharat अध्याय 7.42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र बोले- संजय! वीर बालक अभिमन्यु, जिसका पालन-पोषण बड़े आराम से हुआ था, युद्ध में निपुण था। उसे अपने बाहुबल पर गर्व था। कुलीन कुल में जन्म लेकर भी वह अपना शरीर त्यागकर युद्ध कर रहा था। जब वह तीन वर्ष के उत्तम घोड़ों पर सवार होकर मेरी सेना में प्रवेश कर रहा था, तब क्या युधिष्ठिर की सेना का कोई भी बलवान योद्धा सेना के भीतर उसके पीछे-पीछे आ सकता था?
Dhritarashtra said— Sanjay! The brave boy Abhimanyu, who was brought up in great comfort, was skilled in war. He was proud of his arm strength. Being born in a noble family, he was fighting the war by sacrificing his body. When he was entering my army on excellent horses of three years of age, was any strong warrior from Yudhishthira's army able to follow him inside the formation?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥