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mahabharat 7.41.9: हे राजन! उस दिन सारा आकाश अभिमन्यु के बाणों से इस प्रकार आच्छादित हो गया था, मानो टिड्डियों के दल या मूसलाधार वर्षा से आच्छादित हो। उस आकाश में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.41.9 
शलभैरिव चाकाशे धाराभिरिव चावृते।
अभिमन्यो: शरै राजन् न प्राज्ञायत किंचन॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस दिन सारा आकाश अभिमन्यु के बाणों से इस प्रकार आच्छादित हो गया था, मानो टिड्डियों के दल या मूसलाधार वर्षा से आच्छादित हो। उस आकाश में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
 
O King! That day the entire sky was covered with Abhimanyu's arrows as if it was covered with swarms of locusts or torrents of rain. Nothing was visible in that sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)