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mahabharat 7.41.4-5h: तब मुस्कुराते हुए अभिमन्यु ने धनुष खींचा और एक ही बाण से कर्ण के भाई का सिर धड़ से अलग कर दिया। उसका सिर रथ से उतरकर ज़मीन पर ऐसे गिरा मानो पवन के वेग से कोई कनेर का वृक्ष किसी पर्वत शिखर से उखड़कर गिर पड़ा हो।   |   mahabharat अध्याय 7.41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  7.41.4-5h 
तस्याभिमन्युरायम्य स्मयन्नेकेन पत्रिणा।
शिर: प्रच्यावयामास तद्रथात् प्रापतद् भुवि॥ ४॥
कर्णिकारमिवाधूतं वातेनापतितं नगात्।
 
 
अनुवाद
तब मुस्कुराते हुए अभिमन्यु ने धनुष खींचा और एक ही बाण से कर्ण के भाई का सिर धड़ से अलग कर दिया। उसका सिर रथ से उतरकर ज़मीन पर ऐसे गिरा मानो पवन के वेग से कोई कनेर का वृक्ष किसी पर्वत शिखर से उखड़कर गिर पड़ा हो।
 
Then smiling Abhimanyu drew his bow and with a single arrow severed the head of Karna's brother from his body. His head fell from the chariot to the ground as if a oleander tree uprooted by the force of the wind had fallen from a mountain peak. 4 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)