श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.41.24 
विचरन्तं दिश: सर्वा: प्रदिशश्चापि भारत।
तं तदा नानुपश्याम: सैन्ये च रजसाऽऽवृते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भरत! उस समय धूल से आच्छादित सेना के भीतर अभिमन्यु को सब दिशाओं में घूमते हुए हम देख नहीं पा रहे थे॥24॥
 
Bhaarata! At that time we were unable to see Abhimanyu moving in all directions and sub-directions within the army covered with dust. ॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)