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mahabharat 7.41.22: हे भरतश्रेष्ठ! यह शब्द समस्त दिशाओं में गूंज रहा था। सुभद्रापुत्र ने कौरव सेना पर आक्रमण किया और श्रेष्ठ घोड़ों, रथों और हाथियों का संहार किया।   |   mahabharat अध्याय 7.41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.41.22 
स शब्दो भरतश्रेष्ठ दिश: सर्वा व्यनादयत्।
सौभद्रश्चाद्रवत् सेनां घ्नन् वराश्वरथद्विपान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! यह शब्द समस्त दिशाओं में गूंज रहा था। सुभद्रापुत्र ने कौरव सेना पर आक्रमण किया और श्रेष्ठ घोड़ों, रथों और हाथियों का संहार किया।
 
O best of the Bharatas! That word was echoing in all directions. The son of Subhadra attacked the Kaurava army, killing the best of horses, chariots and elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)