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mahabharat 7.41.2: मुस्कुराते हुए उन्होंने दस बाण छोड़े और अजेय वीर अभिमन्यु को छत्र, ध्वजा, सारथि और घोड़ों सहित शीघ्र ही घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.41.2 
सोऽविध्यद् दशभिर्बाणैरभिमन्युं दुरासदम्।
सच्छत्रध्वजयन्तारं साश्वमाशु स्मयन्निव॥ २॥
 
 
अनुवाद
मुस्कुराते हुए उन्होंने दस बाण छोड़े और अजेय वीर अभिमन्यु को छत्र, ध्वजा, सारथि और घोड़ों सहित शीघ्र ही घायल कर दिया।
 
Smiling, he shot ten arrows and quickly wounded the invincible hero Abhimanyu along with his umbrella, flag, charioteer and horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)