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mahabharat 7.41.1: संजय कहते हैं - हे राजन! वह कर्ण का भाई हाथ में धनुष लेकर जोर से गर्जना करता हुआ तथा बार-बार उसकी डोरी खींचता हुआ तुरन्त ही उन दोनों महाहृदयी वीरों के रथों के बीच आ पहुँचा।   |   mahabharat अध्याय 7.41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 41: अभिमन्युके द्वारा कर्णके भाईका वध तथा कौरव-सेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.41.1 
संजय उवाच
सोऽतिगर्जन् धनुष्पाणिर्ज्यां विकर्षन् पुन: पुन:।
तयोर्महात्मनोस्तूर्णं रथान्तरमवापतत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! वह कर्ण का भाई हाथ में धनुष लेकर जोर से गर्जना करता हुआ तथा बार-बार उसकी डोरी खींचता हुआ तुरन्त ही उन दोनों महाहृदयी वीरों के रथों के बीच आ पहुँचा।
 
Sanjaya says: O King! That brother of Karna, roaring loudly with bow in his hand and pulling the string again and again, immediately arrived between the chariots of those two great-hearted heroes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)