Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.40.5-7h: दूसरों के धन की चोरी, क्रोध, अशांति, लोभ, विद्या का नाश, विश्वासघात, दुस्साहसपूर्ण व्यवहार तथा मेरे महाधनुर्धर पूर्वजों के राज्य की चोरी - इन सब बुराइयों के फलस्वरूप ही उन महाबली पाण्डवों के क्रोध से तुम्हें आज यह दुर्दिन प्राप्त हुआ है। | mahabharat अध्याय 7.40: अभिमन्युके द्वारा दु:शासन और कर्णकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दूसरों के धन की चोरी, क्रोध, अशांति, लोभ, विद्या का नाश, विश्वासघात, दुस्साहसपूर्ण व्यवहार तथा मेरे महाधनुर्धर पूर्वजों के राज्य की चोरी - इन सब बुराइयों के फलस्वरूप ही उन महाबली पाण्डवों के क्रोध से तुम्हें आज यह दुर्दिन प्राप्त हुआ है।
Theft of others' wealth, anger, unrest, greed, loss of knowledge, treachery, daring behaviour and the theft of the kingdom of my fierce archer forefathers - as a result of all these evils, you have got this bad day today due to the anger of those great Pandavas. 5-6 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥