Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.40.3-5h: अरे मूर्ख! तुम पासों के खेल में जीत कर उन्मत्त हो गए थे और राजा धृतराष्ट्र के सामने अपने कटु वचनों से युधिष्ठिर को क्रोधित कर दिया था। शकुनि के दरबार में भी तुमने छल-कपट का सहारा लिया था और भीमसेन से अनेक अनाप-शनाप बातें कही थीं। इससे महामना धर्मराज क्रोधित हुए थे और यही कारण है कि आज तुम्हें इतना बुरा समय झेलना पड़ रहा है।' | mahabharat अध्याय 7.40: अभिमन्युके द्वारा दु:शासन और कर्णकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अरे मूर्ख! तुम पासों के खेल में जीत कर उन्मत्त हो गए थे और राजा धृतराष्ट्र के सामने अपने कटु वचनों से युधिष्ठिर को क्रोधित कर दिया था। शकुनि के दरबार में भी तुमने छल-कपट का सहारा लिया था और भीमसेन से अनेक अनाप-शनाप बातें कही थीं। इससे महामना धर्मराज क्रोधित हुए थे और यही कारण है कि आज तुम्हें इतना बुरा समय झेलना पड़ रहा है।'
Oh fool! You had become mad after winning the game of dice and had angered Yudhishthira with your cruel words in front of King Dhritarashtra. You had also resorted to deceit and fraud in the court of Shakuni and had said many nonsense things to Bhimasena. This angered the great Dharmaraja and this is the reason why you have faced such bad times today.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥