Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.40.29-31h: विजय की इच्छा रखने वाले, समस्त धनुर्धरों में विख्यात, शस्त्रविद्या में श्रेष्ठ, परशुराम के शिष्य और पराक्रमी योद्धा ने अपने उत्तम अस्त्रों का प्रदर्शन करते हुए शत्रुओं से भयभीत सुभद्रापुत्र अभिमन्यु को सैकड़ों बाणों से घायल कर दिया और युद्धस्थल में उसे पीड़ा देने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.40: अभिमन्युके द्वारा दु:शासन और कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 40: अभिमन्युके द्वारा दु:शासन और कर्णकी पराजय  »  श्लोक 29-31h
 
 
श्लोक  7.40.29-31h 
तत: कर्णो जयप्रेप्सुर्मानी सर्वधनुष्मताम्॥ २९॥
सौभद्रं शतशोऽविध्यदुत्तमास्त्राणि दर्शयन्।
सोऽस्त्रैरस्त्रविदां श्रेष्ठो रामशिष्य: प्रतापवान्॥ ३०॥
समरे शत्रुदुर्धर्षमभिमन्युमपीडयत्।
 
 
अनुवाद
विजय की इच्छा रखने वाले, समस्त धनुर्धरों में विख्यात, शस्त्रविद्या में श्रेष्ठ, परशुराम के शिष्य और पराक्रमी योद्धा ने अपने उत्तम अस्त्रों का प्रदर्शन करते हुए शत्रुओं से भयभीत सुभद्रापुत्र अभिमन्यु को सैकड़ों बाणों से घायल कर दिया और युद्धस्थल में उसे पीड़ा देने लगे।
 
Desirous of achieving victory, renowned amongst all archers, best among the experts of weapons, disciple of Parashurama and valiant warrior, displaying his excellent weapons, pierced the enemy-dreaded Abhimanyu, son of Subhadra, with hundreds of arrows and began tormenting him in the battle-field.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)