श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 4: भीष्मजीका कर्णको प्रोत्साहन देकर युद्धके लिये भेजना तथा कर्णके आगमनसे कौरवोंका हर्षोल्लास  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.4.10 
यथा दुर्योधनस्तात सज्ञातिकुलबान्धव:।
तथा त्वमपि सर्वेषां कौरवाणां गतिर्भव॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘पिताजी! जिस प्रकार दुर्योधन अपने परिवार, कुल और मित्रों सहित समस्त कौरवों का आश्रय है, उसी प्रकार आप भी कौरवों के रक्षक बनिए॥10॥
 
‘Father! Just as Duryodhana along with his family, clan and friends are the support of all the Kauravas, in the same way you too become the protector of the Kauravas.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)