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mahabharat 7.39.9-10: तत्पश्चात् परम बुद्धिमान एवं पराक्रमी द्रोणाचार्य के नेत्र प्रसन्नता से चमक उठे। भरत! युद्ध में युद्ध करने वाले कुशल अभिमन्यु को युद्ध करते देखकर उन्होंने तुरन्त कृपाचार्य को संबोधित करके कहा -॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 7.39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  7.39.9-10 
अथाब्रवीन्महाप्राज्ञो भारद्वाज: प्रतापवान्।
हर्षेणोत्फुल्लनयन: कृपमाभाष्य सत्वरम्॥ ९॥
घट्टयन्निव मर्माणि पुत्रस्य तव भारत।
अभिमन्युं रणे दृष्ट्वा तदा रणविशारदम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् परम बुद्धिमान एवं पराक्रमी द्रोणाचार्य के नेत्र प्रसन्नता से चमक उठे। भरत! युद्ध में युद्ध करने वाले कुशल अभिमन्यु को युद्ध करते देखकर उन्होंने तुरन्त कृपाचार्य को संबोधित करके कहा -॥9-10॥
 
Thereafter, the eyes of the most intelligent and valiant Dronacharya lit up with joy. Bhaarat! Seeing the war expert Abhimanyu fighting in the battle, he immediately addressed Kripacharya and said -॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)