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श्लोक  7.39.4 
अभिमन्यु: कृतोत्साह: कृतोत्साहानरिंदमान्।
रथस्थो रथिन: सर्वांस्तावकानभ्यवर्षयत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु युद्ध के लिए उत्साह से भरे हुए थे। रथ पर बैठकर उन्होंने उत्साह में भरे हुए सभी रथियों पर बाणों की वर्षा शुरू कर दी। हे शत्रु संहारक!
 
Abhimanyu was full of enthusiasm for the war. Sitting on the chariot, he started showering arrows on all the charioteers who were full of enthusiasm, O enemy destroyer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)