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mahabharat 7.39.3: संजय ने कहा, 'महाराज! बड़े दुःख के साथ मैं आपसे उस अत्यन्त भयंकर नरसंहार की कथा कह रहा हूँ, जिसमें एक वीर योद्धा ने अनेक महारथियों के साथ भयंकर युद्ध किया था।   |   mahabharat अध्याय 7.39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.39.3 
संजय उवाच
हन्त ते सम्प्रवक्ष्यामि विमर्दमतिदारुणम्।
एकस्य च बहूनां च यथाऽऽसीत् तुमुलो रण:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, 'महाराज! बड़े दुःख के साथ मैं आपसे उस अत्यन्त भयंकर नरसंहार की कथा कह रहा हूँ, जिसमें एक वीर योद्धा ने अनेक महारथियों के साथ भयंकर युद्ध किया था।
 
Sanjaya said, 'Maharaj! It is with great regret that I am telling you the story of the most dreadful massacre in which a brave warrior fought a fierce battle with many great warriors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)