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श्लोक  7.39.27 
एवमुक्त्वानदद् राजन् पुत्रो दु:शासनस्तव।
सौभद्रमभ्ययात् क्रुद्ध: शरवर्षैरवाकिरन्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ऐसा कहकर आपका पुत्र दु:शासन जोर-जोर से दहाड़ने लगा। क्रोध में भरकर वह सुभद्रा के पुत्र पर बाणों की वर्षा करता हुआ उसके सामने आ गया।
 
Maharaj! Having said this, your son Dushasan started roaring loudly. Filled with anger, he went in front of Subhadra's son showering arrows on him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)