Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.39.19: उसे अपने बल और पराक्रम पर गर्व है, क्योंकि वह द्रोणाचार्य द्वारा संरक्षित है। यह मूर्ख अभिमन्यु आत्मप्रशंसा कर रहा है। तुम सब लोग मिलकर शीघ्र ही उसका नाश करो।॥19॥ | mahabharat अध्याय 7.39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संरक्ष्यमाणो द्रोणेन मन्यते वीर्यमात्मन:।
आत्मसम्भावितो मूढस्तं प्रमथ्नीत मा चिरम्॥ १९॥
अनुवाद
उसे अपने बल और पराक्रम पर गर्व है, क्योंकि वह द्रोणाचार्य द्वारा संरक्षित है। यह मूर्ख अभिमन्यु आत्मप्रशंसा कर रहा है। तुम सब लोग मिलकर शीघ्र ही उसका नाश करो।॥19॥
He is proud of his strength and valour because he is protected by Dronacharya. This fool Abhimanyu is self-praising. All of you join hands and crush him soon.'॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥