Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.39.18: परन्तु वे अर्जुन के पुत्र की रक्षा करते हैं, क्योंकि अर्जुन उनके शिष्य हैं। शिष्य और पुत्र सदैव प्रिय होते हैं। पुण्यात्मा पुरुषों को भी अपने पुत्र प्रिय होते हैं॥18॥ | mahabharat अध्याय 7.39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुनस्य सुतं त्वेष शिष्यत्वादभिरक्षति।
शिष्या: पुत्राश्च दयितास्तदपत्यं च धर्मिणाम्॥ १८॥
अनुवाद
परन्तु वे अर्जुन के पुत्र की रक्षा करते हैं, क्योंकि अर्जुन उनके शिष्य हैं। शिष्य और पुत्र सदैव प्रिय होते हैं। पुण्यात्मा पुरुषों को भी अपने पुत्र प्रिय होते हैं॥18॥
‘But he protects Arjuna's son because Arjuna is his disciple. Disciples and sons are always loved. Their children too are loved by virtuous men.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥