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mahabharat 7.39.17: प्यारे सैनिकों! मैं तुमसे सच कहता हूँ। अगर ये सैनिक युद्ध में मरने-मारने पर उतारू हैं, तो यमराज भी इनके विरुद्ध नहीं लड़ सकते; फिर कोई दूसरा मनुष्य इनके सामने कैसे खड़ा हो सकता है?   |   mahabharat अध्याय 7.39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.39.17 
न ह्यस्य समरे युद्धॺेदन्तकोऽप्याततायिन:।
किमङ्ग पुनरेवान्यो मर्त्य: सत्यं ब्रवीमि व:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
प्यारे सैनिकों! मैं तुमसे सच कहता हूँ। अगर ये सैनिक युद्ध में मरने-मारने पर उतारू हैं, तो यमराज भी इनके विरुद्ध नहीं लड़ सकते; फिर कोई दूसरा मनुष्य इनके सामने कैसे खड़ा हो सकता है?
 
Dear soldiers! I am telling you the truth. If these soldiers are ready to kill in the war, then even Yamraj cannot fight against them; then how can any other human being stand against them?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)