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mahabharat 7.38.23-24: द्रोणाचार्य के देखते ही देखते उस महारथी ने उनकी रथसेना पर क्षुप्र, वत्सदन्त, विपथ, नाराच, अर्द्धचन्द्राकार बाण, भल्ल और अंजलीक आदि बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। इससे उन बाणों से आहत हुई सेना युद्ध से विमुख होकर भाग गई। 23-24॥   |   mahabharat अध्याय 7.38: अभिमन्युके द्वारा शल्यके भाईका वध तथा द्रोणाचार्यकी रथसेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 38: अभिमन्युके द्वारा शल्यके भाईका वध तथा द्रोणाचार्यकी रथसेनाका पलायन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  7.38.23-24 
क्षुरप्रैर्वत्सदन्तैश्च विपाठैश्च महायशा:।
नाराचैरर्धचन्द्राभैर्भल्लैरञ्जलिकैरपि॥ २३॥
अवाकिरद् रथानीकं भारद्वाजस्य पश्यत:।
ततस्तत्सैन्यमभवद् विमुखं शरपीडितम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के देखते ही देखते उस महारथी ने उनकी रथसेना पर क्षुप्र, वत्सदन्त, विपथ, नाराच, अर्द्धचन्द्राकार बाण, भल्ल और अंजलीक आदि बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। इससे उन बाणों से आहत हुई सेना युद्ध से विमुख होकर भाग गई। 23-24॥
 
In view of Dronacharya, that great warrior started showering arrows like Kshupra, Vatsadanta, Vipath, Naarach, half-moon shaped arrows, Bhalla and Anjalik etc. on his chariot army. Due to this, the army which was hit by those arrows turned away from the battle and ran away. 23-24॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि अभिमन्युपराक्रमे अष्टात्रिंशोऽध्याय:॥ ३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें अभिमन्यु-पराक्रमविषयक अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)